सीपीएम के इस नेता ने पार की सारी हदें, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर दिया ये विवादित बयान…

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सीपीएम के इस नेता ने पार की सारी हदें, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर दिया ये विवादित बयान...

The CPM leader has given all the limits of the cross, the controversial statement given to Rashtriya Swayamsevak Sangh (नई दिल्‍ली) : अभी-अभी ‘मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी’ (सीपीएम) पोलितब्यूरो के सदस्य ‘एस. रामचंद्रन पिल्लई’ ने आरएसएस को लेकर बड़ा विवादित बयान दिया है. जिसके बाद देशभर में हलचल पैदा हो गई है.

सीपीएम के इस नेता ने पार की सारी हदें, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर दिया ये विवादित बयान...
एस. रामचंद्रन पिल्लई

सीपीएम सदस्य पिल्लै ने अपने बयान में कहा है कि ‘आरएसएस कार्यकर्ता ‘तालिबान’ और ‘खालिस्तानी आतंकवादियों’ की तरह बर्ताव करते नजर आ रहे हैं. वे सबरीमाला मंदिर में समस्याएं पैदा करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं? उन्हें हर चीज शांतिपूर्ण ढंग से होने देना चाहिए, लेकिन वे ऐसा नहीं होने दे रहे हैं.

सूत्रों की माने तो इससे पहले मंगलवार 20 नवंबर को ‘सबरीमाला मंदिर’ में महिलाओं के प्रवेश के मामले में ”राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ (आरएसएस) के हस्तक्षेप को लेकर केरल के मुख्यमंत्री ‘पिनाराई विजयन’ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि वह आरएसएस को सबरीमाला में दूसरा अयोध्या नहीं बनाने देंगे.

सीपीएम के इस नेता ने पार की सारी हदें, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर दिया ये विवादित बयान...
आरएसएस

केरल के मुख्यमंत्री विजयन ने आगे कहा है कि आरएसएस परिवार सबरीमाला के बहाने राज्य को बदनाम कर रहा है. इस मामले में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को सही ठहराते हुए उन्होंने कहा है कि रविवार 19 नवंबर की रात समस्या पैदा करने की कोशिश करने वाले लोगो को पुलिस ने गिरफ्तार किया है.

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ध्यान देने वाली बात यह है कि 800 साल पुरानी प्रथा को लेकर ‘उच्चतम न्यायालय’ ने अपना सबसे बड़ा निर्णय सुनाया. जिसमें हर उम्र की महिलाओं को ‘सबरीमाला मंदिर’ में जाने की अनुमति दी गई है.

सीपीएम के इस नेता ने पार की सारी हदें, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर दिया ये विवादित बयान...
सबरीमाला मंदिर

न्यायालय के फैसले के अनुसार अब सबरीमाला मंदिर में हर आयु की महिलाएं भी ‘भगवान अयप्‍पा’ के दर्शन कर सकती हैं. आपको याद दिला दें कि सबरीमाला मंदिर में 10 साल से 50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी है. मंदिर की इस प्रथा को उच्चतम न्यायालय की एक पीठ ने गैर कानूनी घोषित किया.