इसरो ने किया अब तक के सबसे शक्तिशाली रॉकेट का सफल परिक्षण! जिससे भारतीय वायुसेना को मिलेगी नई ताकत…

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इसरो ने किया अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट का सफल परिक्षण! जिससे भारतीय वायुसेना को मिलेगी नई ताकत...

ISRO’s successful test of the most powerful rocket till now (नई दिल्ली) : अभी-अभी श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से बड़ी खबर आई है. भारतीय वायुसेना के लिए ये सेटेलाइट काफी अहम है. सूत्रों की माने तो बुधवार 18 दिसंबर को ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ (इसरो) ने शाम 4 बजकर 10 मिनट पर ‘जीसैट-7ए’ रॉकेट को लांच किया गया. इससे इंटरनेट की रफ्तार बढ़ेगी. इससे पहले इसरो ने 5 दिसंबर 2018 को अब तक के सबसे भारी-भरकम उपग्रह ‘जीसैट-11’ को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था.

इसरो ने किया अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट का सफल परिक्षण! जिससे भारतीय वायुसेना को मिलेगी नई ताकत...
जीसैट-7ए

सूत्रों की माने तो जीसैट-7ए की यह 13वीं उड़ान है और सातवीं बार यह स्वदेशी क्रायोनिक इंजन के साथ लांच हुआ है. यह कू-बैंड में संचार की सुविधा उपलब्ध करवाएगा. आपको बता दें कि ‘इसरो’ का यह 39वां संचार उपग्रह होगा और इसे खासकर ‘भारतीय वायुसेना’ को बेहतर संचार सेवा देने के उद्देश्य से लांच किया गया है.

आपको याद दिला दें कि इससे पहले 5 दिसंबर को इसरो ने यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी एरियानेस्पेस के ‘फ्रेंच गुआना’ से संचाल सेटेलाइट ‘जीसैट-11’ के सफल प्रक्षेपण के बाद ही अपनी 35वीं संचार सेटेलाइट ‘जीसैट-7ए’ के प्रक्षेपण की घोषणा कर दी थी.

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इससे वायुसेना और ड्रोन ऑपरेशंस में मिलेगी सहायता

जीसैट-7ए के लांच होने के बाद ‘भारतीय वायुसेना’ के एयरबेस को इंटरलिंक करने के अलावा ड्रोन ऑपरेशंस में भी सहायता करेगी. फिलहाल भारत अभी अमेरिका में बने हुए प्रीडेटर-बी या सी गार्डियन ड्रोन को हासिल करने का प्रयास कर रहा है. सैटेलाइट कंट्रोल के जरिए ये ड्रोन अधिक ऊंचाई पर दुश्मन पर हमला करने की क्षमता रखता है.

–  सूत्रों की माने तो 500-800 करोड़ रुपये की लगात में तैयार हुई इस सैटेलाइट में 4 सोलर पैनल लगाए गए हैं. जिनकी मदद से 3.3 किलोवाट बिजली पैदा की जा सकती है.

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– इसके साथ ही इसमें कक्षा में आगे-पीछे जाने या ऊपर जाने के लिए बाई-प्रोपेलैंट का केमिकल प्रोपल्शन सिस्टम भी दिया गया है. इससे पहले इसरो ने जीसैट-7ए सैटेलाइट को लांच किया था. इसे ‘रुकमिणि’ के नाम से जाना जाता है.

– 29 सितंबर 2013 में लांच हुई यह सैटेलाइट नेवी के युद्धक जहाजों, पनडुब्बियों और वायुयानों को संचार की सुविधाएं प्रदान करती है. आने वाले समय में वायुसेना को जीसैट-7 सी मिलने के भी आसार हैं.

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इंटरनेट क्रांति के लिए चार उपग्रह

– देश में इंटरनेट क्रांति के लिए चार उपग्रह प्रक्षेपित करने की योजना है.

– इनमें से जीसैट-19 व जीसैट-29 पहले ही प्रक्षेपित किए जा चुके हैं.

– जीसैट-11, 5 दिसंबर को रात 2:07 से 3:23 बजे के बीच छोड़ा गया.

– जीसैट-7ए, 19 दिसंबर को लॉच किया जाएगा.

– जीसैट-20 अगले साल प्रक्षेपित किया जाएगा.

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यह मिशन आठ वर्ष का होगा

सूत्रों की माने तो इसरो द्वारा तैयार किए गए जीसैट-7ए का वजन 2,250 किलोग्राम है और यह मिशन आठ साल का होगा. मंगलवार 18 दिसंबर को ही इसरो ने मिशन रेडिनेस रिव्यू कमेटी और लांच ऑथराइजेशन बोर्ड ने इसका काउंटडाउन शुरू कर दिया था.