एक और देशद्रोही कांग्रेसी नेता का राष्ट्रगान में बदलाव को लेकर बड़ा बयान! कहा- राष्ट्रगान में सिंध की जगह…

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नई दिल्ली : राज्यसभा में शुक्रवार (16 मार्च) को कांग्रेस सांसद ‘रिपुन बोरा’ ने ‘राष्ट्रगान’ को लेकर एक चौंकाने वाला प्रस्ताव दिया है. जिसको सुनने के बाद सभी दंग रह गये. सूत्रों से जानकारी के अनुसार उन्होंने अपने प्रस्ताव में मांग करते हुए राष्ट्रगान से सिंध शब्द हटाने के लिए कहा है. राष्ट्रगान का यह शब्द एक ऐसे राज्य को संदर्भित करता है जो वर्ष 1947 में ‘भारत’ के विभाजन के बाद आतंकी देश ‘पाकिस्तान’ का टुकड़ा बन गया.

एक और देशद्रोही कांग्रेस नेता का राष्ट्रगान में बदलाव को लेकर बड़ा बयान! कहा- राष्ट्रगान में सिंध की जगह...
रिपुन बोरा

कांग्रेस सांसद ने बोरा ने कहा है कि सिंध की जगह नार्थ ईस्ट शब्द को राष्ट्रगान में जोड़ना चाहिए. जिससे भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्रों का उल्लेख करेगा. साथ ही बोरा ने कहा है कि नॉर्थ ईस्ट ‘भारत’ का अभिन्न अंग है, परंतु ‘राष्ट्रगान’ में यहां का किसी तरह से जिक्र नहीं होता है.  

रिपुन बोरा आगे कहा है कि राष्ट्रगान में सिंध की जगह पर उत्तर पूर्व लिखा जाना चाहिए. उनकी इस मांग पर वर्ल्ड सिंधी कांग्रेस के ‘लखू लुहाना’ ने कड़ा ऐतराज जाहिर करते हुए लिखा है कि हिंद शब्द कहीं से नहीं आया है बल्कि यह सिंध से ही बना है. साथ ही लुहाना ने कहा है कि सिंध से हिंद और हिंद से हिंदुस्तान बना है.

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लखु लुहाना

लखु लुहाना ने अपनी बात को जारी करते हुए कहा है कि ‘रबींद्रनाथ टैगोर’ जिन्होंने राष्ट्रगान की रचना की, उनको इतिहास के बारे बेहतर जानकारी थी और उन्होंने राष्ट्रगान में सिंध को शामिल किया. अब बताये क्या कोई राष्ट्र अपनी सभ्यता को हटा सकता है. चलो मान लेते हैं कि सिंध अब पाकिस्तान का हिस्सा बन चूका है, परंतु हर सिंधी खुद को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं मानता है.

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रबींद्रनाथ टैगोर

बोरा से पहले भी यही मांग मार्च 2016 में शिवसेना के सांसद ‘अरविंद सावंत’ ने की थी, उन्होंने भी प्सिंध को राष्ट्रगान से हटाने की मांग की थी क्योंकि यह पाकिस्तान का हिस्सा है.

रबींद्रनाथ टैगोर को राष्ट्रगान वर्ष 1911 में लिखा था, वह नोबेल पुरस्कार विजेता भी हैं, जब भारतीय क्षेत्र पश्चिम में बलूचिस्तान से लेकर पूर्व तक और सिलहट तक फैला था. दरअसल बंटवारे के बाद, सिंध, बलूचिस्तान, खैबर-पख्तूनख्वा और पंजाब के कुछ हिस्से पाकिस्तान में चले गए हैं. वहीं सिलहट, ढाका और बंगाल के अन्य भागों को पूर्वी पाकिस्तान को सौंप दिया गया, जिसके बाद यह बांग्लादेश बन गया. 

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अरविंद सावंत

रिपुन बोरा ने मांग में यह भी लिखा है कि संविधान सभा में 24 जनवरी 1950 को तत्कालीन राष्ट्रपति ‘राजेंद्र प्रसाद’ ने कहा था कि यदि सरकार चाहे तो वह राष्ट्रगान में बदलाव कर सकती है.