नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में मनाया जायेगा “जश्नेबचपन” उत्सव! देश-विदेश के नाटक एक ही छत के नीचे होंगे मंचित

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नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में मनाया जायेगा

नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, नई दिल्ली : रंगमंच की युवा प्रतिभाओं के लिए अच्छी खबर है. नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा ने 17 नवंबर से बच्चों के लिए शुरू होने जा रहे बहुप्रतीक्षित अंतरराष्ट्रीय रंगमंच उत्सव- “जश्नेबचपन” की घोषणा की. एनएसडी की टीआईई (थियेटर-इन-एजुकेशन) कंपनी के अंतर्गत जीवंत नाटकों के 14 वें संस्करण में सम्मुख, अभिमंचख् अभिकल्प एवं लिटिल थिएटर ग्रुप (एलटीजी) ऑडिटोरियम में स्विट्ज़रलैंड, श्रीलंका और इंडोनेशिया के साथ-साथ भारतीय कलाकारों के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देखने को मिलेंगे.

नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में मनाया जायेगा  "जश्नेबचपन" उत्सव! देश-विदेश के नाटक एक ही छत के नीचे होंगे मंचित

बच्चों का यह नौ दिवसीय रंगमंच अनुभव, जश्नेबचपन एकता और अखंडता का एक वास्तविक उदाहरण है, क्योंकि विभिन्न क्षेत्रों एवं भाषाओं के नाटक यहां एक ही छत के नीचे मंचित किये जायें, फेस्टिवल में बच्चों के साथ और बच्चों के लिए काम करने वाले कुछ सबसे प्रतिष्ठित और साथ ही उभरते थिएटर निदेशकों को पेश किया जायेगा.

इस वर्ष भारत के 21 और विदेशों के तीन समूह अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे, जिनमें श्रीलंका (नॉनवर्बल), स्विट्जरलैंड (अंग्रेजी) और इंडोनेशिया (जावानी) शामिल होंगे,भारत के विभिन्न राज्यों, जैसे महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, पश्चिमबंगाल, केरल, उत्तर प्रदेश, असम, मणिपुर और त्रिपुरा आदि से प्राप्त 221 प्रविष्टियों में से कुल 24 समूहों का चयन किया गया है,नाटकों का मंचन निशब्द, अंग्रेजी, हिंदी व अन्य विदेशी भाषाओं के अलावा बंगाली, मराठी, असमिया और मलयालम जैसी स्थानीय भाषाओं में किया जाएगा.

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पिछले संस्करणों के समान ही, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के परिसर को बच्चों के मेला में परिवर्तित कर दिया जाएगा, क्योंकि उत्सव में 500 से अधिक थिएटर प्रेमी भाग लेने वाले हैं.

उद्घाटन समारोह 17 नवंबर को एनएसडी परिसर में शाम 5.30 बजे आयोजित होगा, जिसके बाद उड़ान नामक एक संगीत व नृत्य प्रदर्शन होगा. इसमें थांगटा पंग चोलम (मणिपुर), कालबोलिया (राजस्थान), गोटिपुआ (उड़ीसा) और भांगड़ा/ लोक संगीत (पंजाब) जैसे समूहों द्वारा चार प्रस्तुतियां दी जायेंगी। डॉ.लईक हुसैन के मार्गदर्शन में असम (बिहू), सिक्किम (शेर नृत्य), नागालैंड (काबुल नागा नृत्य) और मणिपुर (स्टिक बैलेंस) जैसे भव्य कार्यक्रम मुख्य आकर्षण रहेंगे.

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इस बार नाटकों को चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है – बच्चों द्वारा किये जाने वाले प्रदर्शन, बच्चों और वयस्कों के प्रदर्शन, बच्चों के लिए बड़ों के प्रदर्शन और एक कठपुतली शो. नियमित नाटकों के अलावा, थिएटर उत्साही लोगों के लिए छः माह के क्रैश कोर्स-एनएसडी सन्डे क्लब के छात्र भी प्रतिदिन दोपहर को परिसर के हरे-भरे लॉन में अपनी परफॉरमेंस देंगे. इन प्रदर्शनों में दर्शकों को भी शामिल होने का अवसर मिलेगा. इतना ही नहीं, समापन समारोह में सबका मूड अच्छा रखने के लिए कच्छी घोड़ी नृत्य और ढोल का कार्यक्रम होगा.

चूंकि इस उत्सव में बचपन का जश्न मनाया जा रहा है, इसलिए दिल्ली व एनसीआर के विभिन्न गैर सरकारी संगठनों के जरूरतमंद बच्चों को भी उद्घाटन समारोह में भाग लेने और आनंद प्राप्त करने के लिए आमंत्रित किया गया है. इस पहल के पीछे विचार यह है कि ऐसे बच्चों को मुख्य धारा में लाया जाये और जश्नेबचपन जैसे एक वैश्विक मंच पर उनमें मनोरंजन के साथ कला व संस्कृति के प्रति उत्साह पैदा किया जाये.

नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में मनाया जायेगा  "जश्नेबचपन" उत्सव! देश-विदेश के नाटक एक ही छत के नीचे होंगे मंचित
सुरेश शर्मा (एनएसडी डायरेक्टर), अब्दुल लतीफ़ खटाना (टीआईई चीफ), प्रदीप मोहंती (रजिस्ट्रार एनएसडी), अनूप कुमार बरुआ (पीआरओ एनएसडी)

इस मौके पर नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा के निदेशक श्री सुरेश शर्मा ने कहा, “जश्नेबचपन के आयोजन का मुख्य उद्देश्य थिएटर को प्रमुखता में लाना है. डिजिटल माध्यमों की वजह से आधुनिक युग में इसकी चमक फीकी पड़ी है. बच्चे इन दिनों रंगमंच से अवगत नहीं हो रहे हैं, क्योंकि स्कूलों में थिएटर को एक विषय के रूप में नहीं पढ़ाया जाता है. संगीत और कला की तरह रंगमंच को भी स्कूलों में पढ़ाया जाना चाहिए, क्योंकि यह न केवल भावनाओं को व्यक्त करने के सबसे आसन तरीकों में से एक है, बल्कि यह हमें अपने व्यक्तित्व को विकसित करने में सक्षम भी बनाता है.”

थियेटर-इन-एजुकेशन के चीफ श्री अब्दुल लतीफ़ खटाना ने कहा, “हालांकि जश्नेबचपन बालपन और निर्दोषता का एक उत्सव है, परन्तु वास्तव में यह समाज के सभी आयु वर्गों को एक छत के नीचे लाता है. यह उत्सव समाज को एकीकृत करता है. यहाँ तक कि यदि हम जश्नेबचपन में होने वाले प्रदर्शन देखें तो पता चलेगा कि नाटक वयस्कों और बच्चों के बीच सुन्दर सहयोग का परिणाम है.”

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–सागर कुमार