मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के बाद जर्मन मूल की भारतीय लेखिका ने खोली न्यूटन और पायथागोरस की पोल

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मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के बाद जर्मन मूल की भारतीय लेखिका ने खोली न्यूटन और पायथागोरस की पोल
मारिया विर्थ : जर्मन मूल की भारतीय लेखिका

9 जनवरी, 2018 – जर्मन मूल की भारतीय मारिया विर्थ ने न्यूटन और पायथागोरस के सिद्धांत का पर्दाफाश करते हुए ऐसा खुलासा किया है जिसने पूरी दुनिया में कोहराम मचा दिया है.

मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के बाद जर्मन मूल की भारतीय लेखिका ने खोली न्यूटन और पायथागोरस की पोल
मारिया विर्थ : जर्मन मूल की भारतीय लेखिका

कुछ दिनों पहले ब्रिटैन की मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी ने भी खुलासा किया था कि न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण की खोज की ही नहीं बल्कि उसने भारत के ग्रंथों से इस सिद्धांत को चुराया और खुद इसका जनक बन गया.

इसी को लेकर राजस्थान के एक मंत्री वासुदेव देवनानी ने अपने बयान में कहा कि बहुत से विदेशी भारतीय ग्रंथों को चुराकर वैज्ञानिक बन गए. इतना ही नहीं हवाई जहाज का सिद्धांत भी भारत का ही है, इसी प्रकार गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत भी भारत का है. देवनानी के इस जबरदस्त बयान का देश के सेकुलरों, वामपंथियों ने जमकर विरोध किया. क्योंकि इन सेकुलरों के अनुसार हवाई जहाज तो राईट ब्रदर्स ने बनाया और गुरुत्वाकर्षण की खोज न्यूटन द्वारा की गयी थी.

मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के बाद जर्मन मूल की भारतीय लेखिका ने खोली न्यूटन और पायथागोरस की पोल

सेकुलरों के इस विरोध के बाद जर्मन मूल की भारतीय लेखिका मारिया विर्थ ने इनको गजब का जवाब दिया. मारिया विर्थ ने सेकुलरों के झूठ का पर्दाफाश करते हुए बताया कि विदेशियों ने न केवल न्यूटन के सिद्धांत को भारत से चुराया बल्कि गणित का पायथागोरस थ्योरम भी भारत से ही चुराया गया था. भारतीय ग्रंथों से इनको चुराया गया था.

इतना ही नहीं मारिया विर्थ ने उन भारतीय वामपंथियों और सेकुलरों पर भी करारा प्रहार किया जो भारतीयों को इतिहास की गलत या झूठी जानकारी देते हैं. कई महत्वपूर्ण खोज जो भारत में हुए उनको न्यूटन जैसे लोगों ने भारत से चुरा लिया और इस बात को ब्रिटेन की जानी-मानी मेनचेस्टर यूनिवर्सिटी ने भी स्वीकार किया है. साथ ही साफ़ तौर पर कहा कि गुरुत्वाकर्षण की खोज न्यूटन ने नहीं बल्कि भारत ने कई साल पहले ही कर ली थी. लेकिन भारत के वामपंथी और सेकुलर न्यूटन को इसका जनक बताते हैं.

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मारिया विर्थ जो कि जर्मन मूल की हैं लेकिन इसके बावजूद भी वो भारत को ज्ञान की भूमि बताती हैं क्योंकि उन्होंने सच को जाना है. उन्होंने ये भी कहा कि विदेशी लोग भारत से ज्ञान चुराकर प्रसिद्ध वैज्ञानिक बन गए. लेकिन भारत में लोगों को इतिहास की गलत जानकारियां बताई जाती हैं और सच को दबाया जाता है.