बहुमुखी प्रतिभावान अशोक कुमार ने शुरू किया था ‘एंटी हिरो‘ का चलन

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बहुमुखी प्रतिभावान अशोक कुमार ने शुरू किया था ‘एंटी हिरो‘ का चलन
अशोक कुमार (भूतपूर्व बॉलीवुड अभिनेता)

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर, 2016 – आज बॉलिवुड के चर्चित अभिनेता दादामोनी अशोक कुमार का 105वां जन्मदिवस है। उनका जन्म 13 अक्टूबर, 1911 को भागलपुर (बिहार) के एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता कुंजलाल गांगुली एक वकील थे। उनकी मां गौरी देवी ने उनका नाम कुमुद लाल गांगुली रखा था। कुमुद बपचन से फिल्मों में आना चाहते थे, लेकिन वह अभिनेता नहीं, निर्देशक बनना चाहते थे। कोलकाता प्रेसिडेंसी कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और 1934 में न्यू थिएटर्स फिल्म कंपनी में लैब असिस्टेंस के पद पर लग गये। कुछ माह बाद उनके दोस्त व बहनोई (शशाधर मुखर्जी) ने उन्हें अपने पास बाम्बे टॉकिज स्टूडियो में काम करने के लिये बुला लिया।

बहुमुखी प्रतिभावान अशोक कुमार ने शुरू किया था ‘एंटी हिरो‘ का चलन
अशोक कुमार (भूतपूर्व बॉलीवुड अभिनेता)

अचानक बने थे अभिनेता…….
अशोक कुमार को फिल्मों में अभिनेता के तौर पर बहुत नाटकीय ढंग से प्रविष्टि मिली थी। 1936 में बाम्बे टॉकिज की फिल्म (जीवननैया) बन रही थी, जिसकी अभिनेत्री देविका रानी थी। हीरो नज्म उल हसन कुछ बीमार पड़ गये व व्यक्तिगत कारणों से इस फिल्म से अगल हो गये। टाकी के मालिक हिमांशु राय की नजर खूबसूरत नौजवान लैब असिस्टेंस कुमुद पर पड़ी, बस उसे हीरो की भूमिका का ऑफर दिया। कुमुद मना नहीं कर सके। हिमांशु ने उनका फिल्मी नाम अशोक कुमार रखा। इस अशोक कुमार ने धीरे-धीरे जबरदस्त सफलता पाई और स्थापित हीरो बन गये। इससे उनके भाईयों कल्याण (अनूप कुमार) व आभार (किशोर कुमार) को फिल्मों में आने की प्रेरणा मिली।
अभिनय में अशोक कुमार किसी की नकल नहीं करना चाहते थे। अतः उन्होंने अपना अलग स्टाईल बनाया। एक्टिंग के प्रयोग किये व सफल रहे। ‘एंटी हीरो‘ का चलन उन्हीं से शुरू हुआ । 40-50 के दशक में हीरो के रूप में चमके और 80-90 के दशक में चरित्र भूमिकाओं में गजब की अदाकारी से सबको अपना दीवाना बना दिया। सिगरेट फूंकते धनाढ्य, जज, पुलिस अफसर तमाम किरदारों में जनता ने उन्हें पसंद किया।
अशोक कुमार ने लगभग 6 दशकों के कैरियर (1936 से 1997) में 275 फिल्मों में अपनी उपस्थिति दर्षायी। दो बार फिल्म फेयर का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जीता। यह फिल्में राखी (1962) व आशीर्वाद (1968) थीं। आशीर्वाद के लिये उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था। ‘अफसर‘ के लिये सह अभिनेता का पुरस्कार मिला था। आपको पद्भूषण (1999), दादा साहिब फाल्के पुरस्कार (1988) व उत्तर प्रदेश का अवध पुरस्कार (2001) मिले थे।

फिल्में और सफलता….
शुरूआती फिल्मों की नायिका देविका रानी थी – जीवन नैया (1936), अधूत कन्या (1936), जन्मभूमि (1936), इज्जत (1937) सावित्री (1938), निर्मला (1938)। लेकिन इसमें प्रशंसा देविका के हाथ लगी। तत्पश्चात कंगन (1939), बंधन, झूला (1941) में उनका जोरदार अभिनय दिखा। इन फिल्मों की नायिका लीला चिरनेस थीं। लीला के साथ किस्मत (1943) में अशोक कुमार ने लीक से हटकर ‘‘एंटी हीरो‘ की भूमिका की और उन्हें जल्द ही सफलता भी मिली। उस जमाने में इस फिल्म ने एक करोड़ रूपये कमाई की थी। कोलकाता के एक थिएटर पर यह फिल्म 4 वर्ष तक लगातार चली थी।

बहुमुखी प्रतिभा…..
हिमांषु राय के निधन (1943) के बाद अशोक कुमार बाम्बे टाकी को छोड़कर फिल्मिस्तान चले आये। देविका रानी द्वारा 1947 में बाम्बे टाकी को छोड़ने पर अशोक कुमार ने वहां पर प्रोडक्शन चीफ का काम संभाला। इस पद पर अनेक बेहतरीन फिल्में बनाई व कई फिल्मी हस्तियों के कैरियर का भव्य आगाज किया। जिद्दी (1948) से देवानंद व प्राण चमके, नीलकमल (1947) से राजकुमार उभरे। मशाल व मजबूर के बाद महल (1949) से मधुबाला व लता मंगेशकर को हिट किया। लेकिन स्वयं की बनाई फिल्म कंपनी नहीं चली। ‘समाज‘ उनके बैनर की पहली फिल्म थी, लेकिन वह नहीं चली, व फिल्म ‘परिणीता‘ भी औसतन रही। 3 साल बाद भारी घाटे के कारण कंपनी बंद कर दी।

अभिनय में विविधता…..
अशोक कुमार की सर्वाधिक फिल्में नलिनी जयंत व मीना कुमारी के साथ थीं। नलिनी के साथ उनके रोमांस की काफी चर्चा रही, पर कुछ वर्ष बाद मामला ठंडा पड़ गया। चल-चल रे नौजवान (1944), शिकारी, (1946), साजन (1947),

महल (1949), सरगम (1950), समाधि (1950), भाई-भाई (1956), अफसाना (1951), नौबहार (1952), परिणीता (1953), एक ही रास्ता (1956) उनकी बतौर हीरो यादगार फिल्में थीं। चरित्र अभिनय में विविधता से दर्शकों को प्रसन्न किया। कानून (1960) में वह जज थे तो बंदिनी (1963) में बुजुर्ग स्वतंत्रता सेनानी। चित्रलेखा (1969) में बुजुर्ग पुजारी बने तो जमींदार (1970) में भी अभिनय किया। कॉमेडी में अपने भाईयों व मधुबाला के साथ ‘चलती का नाम गाड़ी‘ (1958) में जबरदस्त सफलता हासिल की। कॉमेडी की झलक छोटी सी बात (1975), खूबसूरत (1980) व शौकीन (1982) में थी। विक्टोरिया नंबर 203 में प्राण के साथ हंसोड़ अपराधी बने थे। मेरे महबूब व पाकीजा में मुस्लिम तहजीब पेश की। ‘हावड़ा ब्रिज‘ में मधुबाला के साथ क्राईम थ्रिलर अभिनय में थे। ज्वैलथीप (1967) में दिलचस्प खलनायक नजर आये। आंखों में तुम हो (1997) उनकी अभिनीत की आखिरी फिल्म थी।

टीवी में योगदान….
अशोक कुमार ने मनोरंजन के लिये बड़े परदे के साथ छोटे परदे पर भी खास योगदान दिया था। दूरदर्शन के पहले सोप-ओपेरा ‘हम लोग‘ (1984) में वह सूत्रधार बने थे। साथ ही दूरदर्शन द्वारा निर्मित भीम-भवानी, बहादुर शाह जफर व उजाले की ओर में अभिनय से वाह-वाही लूटी थी।

घर-परिवार…….
अशोक कुमार की पत्नी शोभा देवी थी। दंपत्ति के एक पुत्र (आरूप कुमार) व तीन पुत्रियां (भारती पटेल, रूपा वर्मा व प्रीति गांगुली) थीं। इनमें प्रीति गांगुली फिल्मों में आई व हास्य अभिनय किया, अविवाहित रहीं (मुत्यु 2012)। अशोक कुमार को फोटोग्राफी व बागवानी का शौक था। वैद्य के रूप में उनकी चिकित्सा जानकारी जबरदस्त थी। अशोक कुमार की एक बहिन सती देवी थी, उनके पति शशाधर मुखर्जी थे। उनके भाई अनूप कुमार व किशोर कुमार भी फिल्मों में हिट हुए। संयोग है कि जिस दिन अशोक कुमार का जन्मदिवस (13 अक्टूबर) पड़ता है, उसी दिन किशोर कुमार की मृत्यु (13 अक्टूबर, 1987) हुई। अशोक कुमार ने 10 दिसंबर, 2001 को अपने प्राण त्यागे।

लेखक : अशोक सूद
लेखक : अशोक सूद

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