नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा : “जश्नेबचपन” उत्सव के उद्घाटन समारोह में नन्हें कलाकारों ने बिखेरा जलवा

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नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा :

नई दिल्ली :  नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) के हरे-भरे लॉन में डॉ. लाइक हुसैन के मार्गदर्शन में मणिपुर, असम, राजस्थान, पंजाब और समेत भारत के विभिन्न राज्यों के विविध लोक नृत्यों और संगीत की रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ शनिवार को बच्चों के नाट्य महोत्सव जश्नेबचपन की शुरुआत हुई।

नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा : "जश्नेबचपन" उत्सव के उद्घाटन समारोह में नन्हें कलाकारों ने बिखेरा जलवा

इस बार उत्सव में 23 नाटकों का मंचन होगा। एनएसडी की तरफ से जारी बयान के अनुसार, थिएटर कार्निवल के 14वें संस्करण के उद्घाटन समारोह में संस्कृति मंत्रालय के सचिव अरुण गोयल, प्रतिष्ठित रंगमंच निर्देशक रुद्रप्रसाद सेनगुप्ता और लोकप्रिय अभिनेता व रंगकर्मी मनोज जोशी के अलावा कुछ स्थापित रंग निर्देशक एवं उभरते रंगमंच समूह उपस्थित थे।

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अरुण गोयल ने कहा कि जश्नेबचपन जैसे महोत्सव बच्चों के व्यक्तित्व विकास में सहायक हैं। उन्होंने कहा, “बच्चों के लिए उत्सव आयोजित करने के अलावा, यहां रविवार क्लब जैसे विभिन्न अल्पकालिक पाठ्यक्रम भी आयोजित होते हैं, जो कि एक बहुत अच्छी पहल है। रंगमंच हमें औपनिवेशिक शक्तियों ने नहीं दिया, बल्कि यह हमारा खुद का कला रूप है, जो हमारी ही भूमि पर विकसित हुआ और सदियों से इसका अभ्यास होता आया है।”

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अरुण गोयल : संस्कृति मंत्रालय के सचिव

उद्घाटन समारोह में नाटक समूहों द्वारा उड़ान के मंचन के तहत चार प्रस्तुतियां की गईं। थांगटा पुंग चोलम (मणिपुर), कालबोलिया (राजस्थान), गोटिपुआ (ओडिशा) और भांगड़ा लोक संगीत (पंजाब), बिहू (असम), शेर नृत्य(सिक्किम), काबुल नागा नृत्य (नागालैंड) और स्टिक बैलेंस(मणिपुर) के लोक नृत्यों ने भी दर्शकों से जोरदार प्रशंसा बटोरी।

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इस उद्घाटन समारोह में दिल्ली एवं एनसीआर के विभिन्न गैर सरकारी संगठनों के लगभग 800 बच्चों ने भाग लिया। इस पहल के पीछे विचार यह था कि ऐसे बच्चों को मुख्यधारा में लाया जाए और एक वैश्विक मंच पर मनोरंजन के साथ कला व संस्कृति के प्रति उत्साह पैदा किया जाए।

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1998 में शुरू हुआ जश्नेबचपन एनएसडी की टी.आई.ई. कंपनी का एक उद्यम है, जिसे देश भर में बच्चों के रंगमंच के विकास में योगदान के लिए प्रारंभ किया गया था। साल-दर-साल इसके सफल आयोजन के बाद, यह अब बच्चों के लिए भारत में सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण रंगमंच उत्सवों में से एक हो गया है। इस साल चार सभागारों सम्मुख, अभिमंच, अभिकल्प और लिटिल थिएटर ग्रुप (एलटीजी) में 23 नाटकों का मंचन किया जाएगा।

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