भगवान शनिदेव द्वारा दी गई पीड़ा का क्या है अर्थ? इससे मुक्ति के लिए करें ये उपाय

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भगवान शनिदेव द्वारा दी गई पीड़ा का क्या है अर्थ? इससे मुक्ति के लिए करें ये उपाय

28 मई, 2018 : जैसा कि हम इस बात को भलिभांति जानते है कि शनि ग्रहों के न्यायाधीश और दंडाधिकारी हैं. शनि व्यक्ति द्वारा किए गए शुभ-अशुभ कर्मों के अनुसार फल देते हैं. इसके अलावा भागवान ‘शनिदेव’ बिना किसी कारण के दु:ख नहीं देते हैं. यदि कोई व्यक्ति गलत कर्म करता है तो उसको उसके अनुसार दु:ख मिलता है. शनिदेव इस पीड़ा देने के माध्यम मात्र बनते हैं.  

 

भगवान शनिदेव द्वारा दी गई पीड़ा का क्या है अर्थ? इससे मुक्ति के लिए करें ये उपाय
भगवान शनिदेव

जब भी किसी व्यक्ति को शनिदेव दु:ख देते हैं तो इसके असर क्या होते हैं?

–  शनि द्वारा दी गई पीड़ा से व्यक्ति को स्नायु तंत्र और लम्बी बीमारी की परेशानी हो जाती है.

–  व्यक्ति द्वारा किए जाने वाले हर कार्यों में विलम्ब और रुकावट पैदा होती है.

–  रोजगार और नौकरी आदि मामले में दिक्कतें आने लगती हैं.

–  जीवन में अकेलेपन का सामना करना पड़ता है.

 भगवान शनिदेव द्वारा दी गई पीड़ा का क्या है अर्थ? इससे मुक्ति के लिए करें ये उपाय

शनि द्वारा दिए गए दु:ख से मुक्ति के लिए लोहे का छल्ला क्यूँ कारगर होता है?

–  शनिदेव का आधिपत्य लौह धातु पर होता है.

–  यही कारण है कि लोहे का छल्ला शनिदेव की शक्तियों को नियंत्रित करने के कारगर साबित होता है.

–  लेकिन यह छल्ला कोई सामान्य लोहे का नहीं होता, बल्कि घोड़े की नाल या नाव की कील का बना हुआ होता है.

–  घोड़े के पैरों की घिसी हुआ नाल या लहरों से टकरायी हुई नाव की कील एक विशेष चुम्बकीय प्रभाव रखती है

–  इनसे तैयार किया हुआ छल्ला शनि की पीड़ा को बहुत कम कर देता है.

–  जब भी कोई व्यक्ति इसकी अंगूठी तैयार कराता है तो इसे आग में न तपायें.

 

भगवान शनिदेव द्वारा दी गई पीड़ा का क्या है अर्थ? इससे मुक्ति के लिए करें ये उपाय
लोहे का छल्ला

व्यक्ति को शनि कृपा के लिए किस तरफ लोहे का छल्ला धारण करना चाहिए?

–  शनिवार के दिन के अलावा घोड़े की नाल या नाव की कील की बनी हुयी अंगूठी लेकर आएं. 

–  अंगूठी को शनिवार को सुबह सरसों के तेल में डुबोकर रख दें.

–  तेल में डुबोकर रखी हुई अंगूठी को शाम के समय निकालकर जल से धोकर शुद्ध कर लें.

–  इसके बाद अंगूठी को अपने सामने रखकर ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ का जाप करें.

–  उसके बाद अंगूठी को मध्यमा अंगुली में धारण कर लें.

–  ऐसा करने से शनिदेव की पीड़ा का असर लगभग खत्म हो जाएगा.