विजयादशमी 2018 : रावण के मरने से पहले पूरे नहीं हो पाए ये 7 कार्य, अगर हो जाते तो यह पृथ्वी आज…

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विजयादशमी 2018 : रावण के मरने से पहले पूरे नहीं हो पाए ये 7 कार्य, अगर हो जाते तो यह धरती आज...

These 7 works have not been completed before Ravan’s death (17 अक्टूबर, 2018) : हिन्दू मान्यता के अनुसार ‘दशहरा’ का त्यौहार लोग अधर्म पर धर्म की जीत के रूप में मनाते हैं. इस बार 19 अक्टूबर को ‘विजयादशमी’ का पर्व है. मान्यता यह है कि इसी दिन ‘भगवान श्रीराम’ ने ‘रावण’ का वध किया था. देवताओं को भी पराजित करने वाला रावण महापंडित और महाज्ञानी था. परंतु रावण की सबसे बड़ी कमजोरी यह थी कि वह अपने बल और ज्ञान के अहंकार में खुद को ही भगवान मान बैठा था और ईश्वर के बनाए नियमों में बदलाव करना चाहता था. यदि रावण कुछ कुछ साल और जीवित रहता तो अपने 7 अधूरे काम को पूरा कर लेता और फिर दुनिया कुछ  अलग ही होती. आइए जानते हैं रावण के सात अधूरे काम क्या हैं.

विजयादशमी 2018 : रावण के मरने से पहले पूरे नहीं हो पाए ये 7 कार्य, अगर हो जाते तो यह धरती आज...
विजयादशमी

कहा जाता है कि रावण का सबसे पहला सपना था ‘स्वर्ग में सीढ़ी’ बनाना. वह चाहता था कि हर व्यक्ति स्वर्ग जाए इसलिए वह धरती से लेकर स्वर्ग तक सीढ़ियां बनाने का कार्य भी शुरू कर चुका था, परंतु जब तक यह सीढ़ी बनकर तैयार होती ‘भगवान श्रीराम’ ने रावण को मार दिया.

रावण की दूसरा सपना था समुद्र के पानी को मीठा करना. वह इस बात को भलिभांति जनता था कि पृथ्वी पर पीने का पानी कम है. यदि समुद्र का पानी मीठा हो जाए तो पीने के पानी की परेशानी हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी.

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इसके आगे उसका तीसरा अधूरा काम सोने में सुगंध भरना था. यही बड़ा कारण था कि रावण सोने का शौकीन था इसलिए उसने अपनी पूरी नगरी सोने की बनाई थी। रावण चाहता था कि सोने में सुगंध आ जाए ताकि उसे कहीं भी सुगंध से जान लिया जाए इससे सोने की तलाश आसान हो जाएगी.

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रावण अगर कुछ दिन और जीवित रहता तो मदिरा को गंधहीन बना देता. रावण की चौथी इच्छा थी कि मदिरा में कोई गंध नहीं हो जिससे सभी लोग मदिरापान का आनंद ले सकें.

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सोने की लंका

रावण का पांचवा अधुरा सपना था कि खून का रंग लाल होता है जिसे रावण सफेद करना चाहता था, जिससे उसके द्वारा किए जाने वाली हत्या की जानकारी ना हो.

रावण स्वयं काला था इसलिए वह रंगभेद को समाप्त करना चाहता था. वह चाहता था कि सभी लोग गोरे दिखाई दें जिससे कोई किसी को उनके सांवले रंग को लेकर मजाक न करे.

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इस्गे आगे रावण का अंतिम सपना था कि संसार भगवान की पूजा बंद कर दे और उसकी पूजा करे लेकिन रावण का यह सपना उसके साथ ही टूट गया.