रूस देगा भारत को दुनिया का सबसे विनाशकारी हथियार! जिसके बाद चीन-पाक में मचा हाहाकार

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रूस के देगा भारत को दुनिया का सबसे विनाशकारी हथियार! जिसके बाद चीन-पाक में मचा हाहाकार

नई दिल्ली : देश की सुरक्षा और विरोधियों को धूल चटाने के लिए रक्षा मंत्री ‘निर्मला सीतारमण’ अपनी आने वाली रूस की यात्रा के दौरान रूस के साथ बड़ा सौदा करनी वाली हैं. जिसके बाद से चीन और पाकिस्तान में खलबली मच गयी है. जानकारी के अनुसार रक्षामंत्री सीतारमण रूस से ‘एस-400’ ट्रायम्फ वायु रक्षा प्रक्षेपास्त्र प्रणाली की खरीद का समझौता करने वाली है.  यह जानकारी यहां आधिकारिक सूत्रों ने दी.

रूस के देगा भारत को दुनिया का सबसे विनाशकारी हथियार! जिसके बाद चीन-पाक में मचा हाहाकार
निर्मला सीतारमण

सूत्रों ने जानकारी देते हुए कहा है कि रूस के साथ यह सौदा केवल अनुमानित 40,000 करोड़ रुपये के कारण अटका हुआ है. इसके आगे सूत्रों ने कहा है कि भारत का मकसद इस सौदे को रक्षामंत्री सीतारमण की यात्रा के दौरान ही निपटा लिया जाए. साथ ही यह भी कहा है कि रक्षामंत्री सीतारमण वह छह सप्ताह के अन्तराल में मास्को दौरा भी कर सकती है. आपको बता दें कि आकाश में लक्ष्यों को भेदने वाले ‘एस-400’ ट्रायम्फ प्रक्षेपास्त्रों की मारक क्षमता 400 किलोमीटर/ घंटा की है. इसको रूस की सबसे समुन्न्त प्रणाली माना जा रहा है.

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एस-400

खबर मिली है कि चीन के जुड़ी लगभग 4000 किलोमीटर लंबी सीमा पर भारत अपनी सैन्य तैयारियों को शक्तिशाली बनाने और अपनी वायु सीमाओं की रक्षा के लिए इसकी खरीद चाहता है. सूत्रों से जानकारी के अनुसार साल 2014 में चीन ने एस-400 की खरीद के लिए रूस से समझौता किया था. जिस पर उसको इसकी आपूर्ति शुरू भी हो गयी है. परंतु अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि चीन कितने प्रक्षेपास्त्र खरीद रहा है. मोस्को यात्रा के दौरान निर्मला सीतारमण एस-400 की खरीद का सौदा निपटाने पर होगा. एस-400 को रूस की ‘अलमाझ-एंटे कंपनी’ बनाती है और इसको रुसी सेना में साल 2007 से शामिल किया गया था. 

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एस-400 को खरीदने के लिए भारत लगभग रूस से डेढ़ साल से भी ज्यादा समय से बातचीत कर रहा है और कम से कम पांच प्रणालियां खरीदना चाहता है. जानकारी के अनुसार यह प्रणाली तीन अलग-अलग तरीके से प्रक्षेपास्त्र दाग सकती है. साथ ही यह इस प्रकार वायु सुरक्षा की एक अलग-अलग परत जैसा तैयार करती है. सूत्रों की जानकारी के अनुसार रुस के साथ पांचवी पीढ़ी के विमानों के सौदे को लेकर किसी तरह का निर्णय नहीं लिया गया है क्योंकि इसकी लागत बहुत ही महंगी है.